Gurugram news: जुर्माने में उड़ रहा नगर निगम का खजाना!
पर्यावरणीय नुकसान के नाम पर अब तक छह करोड़ रुपए के जुर्माने का भुगतान कर चुका है निगम
मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल की पंक्तियां "कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता", शायद गुरुग्राम नगर निगम के अधिकारियों पर ही लिखी गई है। मसला बांधवाड़ी लैंडफिल साइट पर कूड़ा निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही का है। यहां कूड़ा निस्तारण के लिए दो एजेंसियां नियुक्त है, जो वर्षों से कूड़ा निस्तारण में विफल हो रही है। जाहिर तौर पर इससे अरावली और आसपास के गांवों में प्रदूषण दिनों दिन बढ़ रहा है।
गुरुग्राम: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल की पंक्तियां "कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं कोई बेवफ़ा नहीं होता", शायद गुरुग्राम नगर निगम के अधिकारियों पर ही लिखी गई है। मसला बांधवाड़ी लैंडफिल साइट पर कूड़ा निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही का है। यहां कूड़ा निस्तारण के लिए दो एजेंसियां नियुक्त है, जो वर्षों से कूड़ा निस्तारण में विफल हो रही है। जाहिर तौर पर इससे अरावली और आसपास के गांवों में प्रदूषण दिनों दिन बढ़ रहा है। अब असल मुद्दा ये है कि इस पर्यावरणीय नुकसान के लिए नगर निगम जुर्माने के तौर पर अपना खजाना उड़ा रहा है। एक साल में निगम ने एक करोड़ 20 हजार रुपए का जुर्माना भरा था। बताया जा रहा है कि यह अब बढ़कर करीब छह करोड़ रुपए हो गया।
यह बड़ा सवाल है कि एजेंसियों की लापरवाही का जुर्माना नगर निगम क्यों भुगत रहा है। इसीलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि एजेंसियों की लापरवाही पर लगाम लगाने की बजाय नगर निगम लगातार जुर्माना भर रहा है। इसमें नगर निगम की कुछ तो मजबूरी होगी। यह जुर्माना हरियाणा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड वसूल रहा है तो जाहिर है उच्चाधिकारियों को भी इसका पूरा इल्म है। शासन और प्रशासन के स्तर पर शायद यह सभी के संज्ञान में है। बावजूद इसके एजेंसियों पर कार्रवाई से इतर गुरुग्राम के नागरिकों से विभिन्न मद में वसूली कर उस पैसे को जुर्माने में उड़ाया जा रहा है।

बांधवाड़ी के कारण स्थिति भयावह, पीने लायक नहीं है पानी: बंधवाड़ी लैंडफिल साइट को लेकर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) की जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बंधवाड़ी प्लांट और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों से पिछले एक साल के भीतर लिए गए भूजल और लीचेट के सभी 80 से अधिक नमूने लैब जांच में पूरी तरह फेल पाए गए हैं।
प्रदूषण बोर्ड की इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि बंधवाड़ी और उसके आसपास के दर्जनों गांवों का भूमिगत जल अब इंसानों तो क्या, पशुओं के इस्तेमाल लायक भी नहीं बचा है। इस घोर लापरवाही और अरावली को प्रदूषित करने के एवज में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नगर निगम गुरुग्राम पर अब तक कुल छह करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगा चुका है। निगम का दावा है कि कूड़ा निस्तारण बेहतर कराया जा रहा है।
हर महीने लिए जा रहे सैंपल, नहीं बदल रही रिपोर्ट, हर बार फेल: प्रदूषण बोर्ड के नियमों के तहत हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक विशेष तकनीकी टीम हर महीने बंधवाड़ी लैंडफिल साइट, उसके आसपास के नलकूपों, बोरवेल और वहां जमा होने वाले लीचेट के छह से सात नमूने एकत्र कर सरकारी लैब में जांच के लिए भेजती है। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पिछले 12 महीनों से लगातार हर महीने आने वाली जांच रिपोर्ट में ये सभी नमूने मानकों पर पूरी तरह फेल मिल रहे हैं। पानी में रासायनिक तत्वों और भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक पाई गई है। अधिकारियों द्वारा पर्यावरण को लगातार पहुंच रहे इस नुकसान पर कार्रवाई करते हुए अकेले पिछले एक साल के भीतर ही नगर निगम पर एक करोड़ 20 लाख रुपये का अतिरिक्त पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया है, जिससे कुल जुर्माने की राशि बढ़कर अब छह करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
एसटीपी की बजाय अरावली में बहाया जा रहा लीचेट: बंधवाड़ी में एकत्रित होने वाले खतरनाक लीचेट के स्थाई निस्तारण को लेकर नगर निगम और वहां काम कर रही मुख्य एजेंसियों ने अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रबंध नहीं किया है। प्लांट से निकलने वाले इस अत्यधिक जहरीले काले पानी को टैंकरों में भरकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए नगर निगम ने दो अन्य निजी एजेंसियों को ठेका दिया हुआ है। इस काम के लिए इन एजेंसियों को हर महीने लाखों रुपये का भुगतान जनता की गाढ़ी कमाई से किया जा रहा है। पर्यावरणविदों का आरोप है कि रात के अंधेरे में लीचेट को खुलेआम अरावली के जंगलों में बहाया जा रहा है। अरावली की पहाड़ियों और ढलानों पर बहकर यह जहरीला पानी जंगलों के भीतर तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल वन्यजीवों के जीवन पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि यही पानी धीरे-धीरे रिसकर जमीन के भीतर जा रहा है, जो पूरे इलाके के वाटर टेबल को जहरीला बना रहा है।
गांवों में बढ़ रहा कैंसर और पेट की बीमारियां: स्थानीय पर्यावरणविदों और बंधवाड़ी, ग्वालपहाड़ी व मांगर गांव के निवासियों का कहना है कि जमीनी पानी के दूषित होने के कारण अरावली के इस बेल्ट में स्थित गांवों में कैंसर, त्वचा रोग और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बार-बार एनजीटी की फटकार और करोड़ों के जुर्माने के बावजूद नगर निगम गुरुग्राम की कुंभकर्णी नींद नहीं टूट रही है। यदि फौरन इन दो निजी एजेंसियों के काम की समीक्षा नहीं की गई और लीचेट का जंगलों में बहना बंद नहीं हुआ, तो आने वाले मानसून में यह स्थिति और भी भयावह हो जाएगी, क्योंकि बारिश के पानी के साथ मिलकर यह जहर दिल्ली-एनसीआर के अन्य नजदीकी इलाकों के भूजल को भी अपनी चपेट में ले लेगा बंधवाड़ी में लीचेट का नियमों के अनुसार निस्तारण नहीं किया जा रहा है। बीते एक साल में विभाग ने बंधवाड़ी के आसपास से जितने भी नमूने लिए हैं उन सभी की रिपोर्ट फेल आई है। इसी को लेकर निगम पर हर महीने दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है।
आकांक्षा तंवर, क्षेत्रिय अधिकारी, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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