सोहना एक्सप्रेसवे में फिर हुए "भ्रष्टाचार का गड्ढा"
दो साल में चार बार धंसा दो हजार करोड़ का एक्सप्रेसवे
गुरुग्राम से सोहना के बीच बनाए गए एक्सप्रेसवे में फिर "भ्रष्टाचार का गड्ढा" का गड्ढा हो गया। हैरानी यह है कि दो हजार करोड़ रुपए की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे दो साल में चौथी बार धंसा है।
गुरुग्राम: गुरुग्राम से सोहना के बीच बनाए गए एक्सप्रेसवे में फिर "भ्रष्टाचार का गड्ढा" का गड्ढा हो गया। हैरानी यह है कि दो हजार करोड़ रुपए की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे दो साल में चौथी बार धंसा है। यानी हर छह महीने में इसमें भ्रष्टाचार के गड्ढे बन रहे हैं। इसके निर्माण पर शासन से लेकर प्रशासन तक श्रेय लेने की होड़ में आज तक जुटे हैं, लेकिन इसके घटिया निर्माण की जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं। आज तक इसके घटिया निर्माण के जिम्मेदारों पर भी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। बताया जाता है कि इस बार जीएमडीए की मेन पाइपलाइन टूटने के कारण एक्सप्रेस-वे का एक हिस्सा अचानक धंस गया। गनीमत रही कि इस बार कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ लेकिन प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एहतियात के तौर पर ट्रैफिक के लिए एक लेन बंद कर दी गई है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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घटना सुभाष चौक के पास हुई। जहां जीएमडीए की सीवर लाइन टूटने से सड़क का हिस्सा धंस गया। सूचना मिलते ही निर्माण कंपनी ओरिएंटल इंफ्रास्ट्रक्चर और जीएमडीए के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेस-वे के नीचे से गुजर रही सीवर लाइन के पाइप टूटने से यह स्थिति बनी है। वहीं जीएमडीए अधिकारियों का दावा है कि निर्माण के दौरान सीवर लाइन को शिफ्ट करने का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे नहीं माना गया।
कब-कब हुए भ्रष्टाचार के गड्ढे
यहां दिसंबर 2023, जुलाई 2024 और सितंबर 2024 में भी इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। बार-बार हो रहे धंसाव से लोगों में डर का माहौल है और जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
एनएचएआई ने झाड़ा पल्ला
एनएचएआई ने जीएमडीए पर अपना पल्ला झाड़ लिया है। परियोजना निदेशक योगेश तिलक का कहना है कि हाईवे के नीचे लगभग 100 मीटर सीवर की पाइपलाइन है। पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है। इसे बदलने के लिए जीएमडीए को कहा गया है।

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