Mewat Ferozepur Jirkha News: बर्फ के सहारे शव रखने की तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
अल-आफिया अस्पताल मांडीखेड़ा की व्यवस्था पर सवाल, क्षेत्र के लोगों ने अस्पताल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांगी जवाबदेही।
अल-आफिया अस्पताल, मांडीखेड़ा में एक शव को बर्फ के टुकड़ों के बीच रखने की तस्वीर सामने आने के बाद क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फिरोजपुर झिरका। अल-आफिया अस्पताल, मांडीखेड़ा में एक शव को बर्फ के टुकड़ों के बीच रखने की तस्वीर सामने आने के बाद क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तस्वीर में शव को सुरक्षित रखने के लिए बर्फ का सहारा लिया गया दिखाई दे रहा है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं और शव संरक्षण की व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं ब्लॉक समिति सदस्य शमीम अहमद एडवोकेट साकरस, मुबारिक अटेरना, आरिफ ठेकेदार ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे बेहद गंभीर और संवेदनशील विषय बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके शव को सम्मानपूर्वक और सुरक्षित रखने की व्यवस्था करना भी स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि परिजनों को अपने मृत परिजन के शव को सुरक्षित रखने के लिए स्वयं बर्फ का इंतजाम करना पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है।
क्षेत्र के लोगों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का मूल्यांकन केवल मरीजों के इलाज से नहीं किया जा सकता। अस्पतालों में मृत्यु के बाद शवों के सुरक्षित संरक्षण के लिए भी पर्याप्त और मानक सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गरीब और ग्रामीण परिवार पहले ही अपने परिजन की मौत के दुख से गुजर रहे होते हैं, ऐसे में उन्हें शव सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ें तो यह बेहद चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल अस्पताल प्रशासन ही नहीं, बल्कि संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों और क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। यदि अस्पताल में पर्याप्त डीप फ्रीजर अथवा शवगृह की सुविधा उपलब्ध नहीं है तो स्वास्थ्य विभाग को तत्काल आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए।
उन्होंने सीएमओ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर अस्पताल की वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा क्षेत्र के लोगों को केवल घोषणाओं और औपचारिकताओं की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में चिकित्सक, दवाइयां, जांच सुविधाएं, मरीजों की देखभाल और शवों के सुरक्षित संरक्षण की व्यवस्था—सभी स्वास्थ्य सेवा का अभिन्न हिस्सा हैं।
अंत मे उन्होंने कहा किसी परिवार में मौत का दर्द पहले ही असहनीय होता है। उस दर्द के ऊपर यदि परिजनों को अपने मृत परिजन के शव को सुरक्षित रखने के लिए बर्फ तक जुटानी पड़े, तो यह बेहद पीड़ादायक स्थिति है। इस मामले को राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि अल-आफिया अस्पताल मांडीखेड़ा में शवों के सुरक्षित संरक्षण की पर्याप्त व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर उचित कार्रवाई की जाए। इस मामले में सीएमओ से संपर्क साधा गया परन्तु उनका नंबर बन्द मिला।
वहीं बताते चलें कि शुक्रवार की रात गांव अलीपुर तिगरा निवासी जावेद पुत्र इलियास की मानसिक तनाव के चलते फंदे से लटकने से मौत हो गई थी। जावेद का शव पूरी रात मांडीखेड़ा के अल-आफिया अस्पताल में बिना डीप फ्रीजर के पड़ा रहा। मजबूरीवश परिजनों ने शव को सुरक्षित रखने और बदबू से बचाने के लिए बर्फ का सहारा लिया। शव के आसपास बर्फ रखे जाने की तस्वीर सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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