अपने सपनों को भविष्य पर नहीं टालना चाहता जेन जी: संजय मग्गू

संजय मग्गू
वैसे तो सपने सभी देखते हैं। हमारी पीढ़ी के भी सपने थे। हमसे पूर्व की पीढ़ी के भी कुछ न कुछ सपने जरूर रहे होंगे। हमारी अगली पीढ़ी के भी कुछ सपने हैं। हर पीढ़ी अपनी पूर्ववर्ती पीढ़ी से अलग हटकर सपने देखती है और उसे पूरा करने का प्रयास करती है। जेन जी के भी सपने हैं। हमारी पीढ़ी और जेन जी पीढ़ी के बीच मौलिक अंतर यह है कि यह पीढ़ी तकनीकी क्रांति के दौरान पैदा हुई है। इसके सामने सूचनाओं का अथाह भंडार है। सूचनाओं का विस्फोट हर क्षण होता रहता है, इस वजह से यह पीढ़ी हमारी पीढ़ी से कहीं ज्यादा सजग है, नई-नई जानकारियों से लैस है। इस पीढ़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह अपने शहर, राज्य या देश पर ही नजर नहीं रखती है। यह पूरी दुनिया पर नजर रखती है। दुनिया में कहीं भी होने वाली घटना के बारे में यदि जानने की जरूरत हुई, तो वह पूरी जानकारी हासिल करती है। आधी अधूरी जानकारी रखना उसे पसंद नहीं है। यही वजह है कि वह पूरे दम खम और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखती है। वह अपनी तुलना दूसरे देशों के युवाओं से करते हैं। मुझे कितनी स्वतंत्रता प्राप्त है, रोजगार, नौकरी, शिक्षा, चिकित्सा सुविधा हमें कितनी हासिल है और दुनिया के अन्य देशों में युवाओं को कितनी हासिल है। यह सब कुछ जानते हैं। यह तुलना ही उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग बनाती है।
ज्ञान, जानकारी और ऊर्जा का समागम उन्हें गति प्रदान करता है। वह अपने पीछे रह गए लोगों के इंतजार में अपना समय बरबाद नहीं करते हैं। जो व्यक्ति, विचारधारा, राजनीतिक दल उनके मकसद में सहायक नहीं लगता है, वह उसको छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। जेन जी के सामने दिक्कत यह है कि उसने कांग्रेस का शासनकाल नहीं देखा है। पढ़ा-सुना जरूर है, लेकिन व्यक्तिगत अनुभव उसे केवल भाजपा के शासनकाल का ही है। अगर वह दो शासनकाल की तुलना करना चाहे, तो उसके सामने केवल भाजपा का ही शासनकाल है। ऐसी स्थिति में अच्छा या बुरा जो भी आकलन करना है, वह भाजपा के ही संदर्भ में करेगा। वैसे तो इन दिनों देश का हर राजनीतिक दल जेन जी को अपने पाले में लाने को लालायित है। लेकिन उनकी आकांक्षाओं को समझने को कोई भी तैयार नहीं है। यह जेन जी परिश्रम करने से नहीं कतराती है। लेकिन भरपूर परिश्रम करने के बाद यदि बार-बार पेपरलीक होगा, शिक्षा व्यवस्था में तमाम तरह की खामियां ही खामियां दिखेंगी, तो वह इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। वह अपने परिश्रम का फल चाहता है। वह गीता के कर्मफल का सिद्धांत नहीं मानता है। जब कर्म वह करेगा, तो फल हासिल करने का हक भी उसे ही है। वह बेचैन है, उसकी बेचैनी सपनों की पूर्ति में लगने वाले समय की वजह से है। वह अपने सपनों को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है। वह सपनों को टालने के पक्ष में कतई नहीं है। यही वजह है कि हमारी पीढ़ी के लोगों को जेन जेड उतावले लगते हैं।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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