Nuh/Nagina News: लाखों की लागत से बन रहे नाले में घोटाले की आशंका! जगह-जगह दरारें, घटिया निर्माण का आरोप, ग्रामीणों ने डीसी से कराई जांच की मांग

"पहली बारिश में खुल जाएगी निर्माण की पोल", कफील खान ने जेई, ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का लगाया आरोप

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नूंह शहर के मेवली मोड़ से गांव खेड़ला तक पुराने दिल्ली-अलवर रोड के किनारे लाखों रुपये की लागत से बन रहे निर्माणाधीन नाले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 

नगीना: नूंह शहर के मेवली मोड़ से गांव खेड़ला तक पुराने दिल्ली-अलवर रोड के किनारे लाखों रुपये की लागत से बन रहे निर्माणाधीन नाले को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गांव खेड़ला निवासी कफील खान पुत्र रफीक खान ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ जिला उपायुक्त नूंह को शिकायत सौंपकर निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं, घटिया सामग्री के इस्तेमाल और तकनीकी मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। शिकायत में पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने, जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य पर रोक लगाने तथा दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
कफील खान का आरोप है कि निर्माण कार्य में संबंधित जेई, ठेकेदार तथा विभाग के अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि नाले की दीवारों और ऊपर डाली जा रही आरसीसी स्लैब में निर्धारित मात्रा से बेहद कम सरिया लगाया जा रहा है। इसके अलावा निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों से कम मात्रा में सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है तथा तलहटी में भी पर्याप्त रोड़ी और अन्य निर्माण सामग्री नहीं डाली जा रही, जिससे पूरा निर्माण कमजोर हो रहा है।
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों में भी निर्माणाधीन स्लैब पर जगह-जगह लंबी और चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं। कफील खान का कहना है कि निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन स्लैब में पहले ही कई स्थानों पर दरारें पड़ गई हैं और कुछ हिस्से टेढ़े दिखाई देने लगे हैं। उनका आरोप है कि यह घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी का परिणाम है। उनका कहना है कि यदि निर्माण की यही स्थिति रही तो पहली ही बरसात में नाले की गुणवत्ता की पोल खुल जाएगी।

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शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि नाले के साथ बनाया जा रहा पानी स्टोरेज टैंक भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं बनाया गया है। उनका कहना है कि टैंक के अंदर मजबूती के लिए जितने आरसीसी पिलर (कॉलम) दिए जाने चाहिए थे, उससे काफी कम संख्या में पिलर लगाए गए हैं। साथ ही पिलरों और बीम का निर्माण भी तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं किया गया।

उनका दावा है कि इसी कारण टैंक में पहले ही टेढ़ापन आ गया था, जिसके बाद ठेकेदार द्वारा उसकी दोबारा मरम्मत कराई गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि इसी प्रकार घटिया निर्माण जारी रहा तो भविष्य में टैंक की मजबूती और सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस नाले का निर्माण वर्षों तक जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए, वह निर्माण पूरा होने से पहले ही कमजोर दिखाई देने लगा है। उनका आरोप है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले भी पब्लिक हेल्थ विभाग के एसडीओ, एक्सईएन सहित अन्य अधिकारियों को दी थी। इसके अलावा सीएम विंडो समाधान पोर्टल पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर ध्यान नहीं दिए जाने से ग्रामीणों में भारी रोष है।
कफील खान ने जिला उपायुक्त से मांग की है कि निर्माणाधीन नाले का स्वतंत्र तकनीकी निरीक्षण कराया जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की लैब जांच कराई जाए, जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए तथा यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित जेई, विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता ने बताया कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो इस पूरे मामले को आगामी ग्रीवेंस (जन शिकायत) बैठक में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा, ताकि उच्च अधिकारियों के समक्ष पूरे मामले को रखा जा सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो वे इस मुद्दे को लेकर बड़ा जनआंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि यह केवल खराब निर्माण का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी धन की बर्बादी और जनता की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

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