नूंह में पुलिस एक्शन पर बवाल, विशेष जांच की उठी मांग

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पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के साथ होने वाले कथित अमानवीय व्यवहार और सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक करने के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया गया है

नूंह:  हरियाणा के मेवात नूंह क्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के साथ होने वाले कथित अमानवीय व्यवहार और सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक करने के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद फारुख अब्दुल्ला ने इस संबंध में हरियाणा के पुलिस महानिदेशक को एक औपचारिक शिकायत भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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वहीं डीजीपी को भेजे गए पत्र में अधिवक्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नूंह क्षेत्र में पुलिस द्वारा "एनकाउंटर" के नाम पर आरोपियों के घुटनों में पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारने की घटनाएं बढ़ रही हैं। शिकायत के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई से व्यक्ति को स्थायी रूप से विकलांग बना दिया जाता है, जो कि कानून की प्रक्रिया और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इसे "क्रूर और अमानवीय" करार दिया।
वहीं अधिवक्ता फारुख अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट के 2017 के 'निजता के अधिकार' (आर्टिकल 21) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपियों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि जब तक दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक किसी भी व्यक्ति को अपराधी की तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानूनी मर्यादा के खिलाफ है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि दोष सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति को सजा देना ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘प्रेसम्पशन ऑफ इनोसेंस’ के सिद्धांत का उल्लंघन है। नूंह क्षेत्र में सामने आ रही ऐसी घटनाएं सत्ता के दुरुपयोग और संवैधानिक सुरक्षा की अनदेखी को दर्शाती हैं।

ये की गई प्रमुख मांगें:
- ऐसे अमानवीय और अवैध तरीकों पर तुरंत रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं।
- आरोपियों की फोटो/वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
- दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
- नूंह मेवात क्षेत्र में इन घटनाओं की विशेष जांच कराई जाए।
अधिवक्ता का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना अदालत का काम है। पुलिस द्वारा जांच के नाम पर किसी को स्थायी रूप से शारीरिक क्षति पहुँचाना कानून के शासन और सिद्धांत के विपरीत है। — मोहम्मद फारुख अब्दुल्ला, अधिवक्ता

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