Gurugram News: डीटीपी की कार्रवाई पर उठे सवाल : निवासियों पर कार्रवाई, बड़े डेवलपर्स के गंभीर उल्लंघनों की अनदेखी के आरोप

बड़े डेवलपर्स के प्रोजेक्ट की जांच की मांग

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डीटीपी विभाग द्वारा गुरुग्राम में अवैध पीजी एवं आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे तोड़फोड़ अभियान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गुरुग्राम: डीटीपी विभाग द्वारा गुरुग्राम में अवैध पीजी एवं आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे तोड़फोड़ अभियान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होना उचित है। परंतु यह भी उतना ही आवश्यक है कि कानून का समान रूप से पालन कराया जाए और बड़े डेवलपर्स को किसी प्रकार का विशेष संरक्षण न मिले।whatsapp-image-2026-06-16-at-10.40.59-pm
 
निवासियों और पीड़ितों की ओर से मीडिया के साथ एक मामला साझा करते हुए बताया कि इस संदर्भ में डीएलएफ साइबर सिटी का मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2001 में डीएलएफ को आईटी/आईटीईएस पार्क स्थापित करने के उद्देश्य से लाइसेंस प्रदान किया गया था। उपलब्ध सरकारी अभिलेखों से यह भी स्पष्ट होता है कि समय-समय पर नीतियों में संशोधन किए गए, जिनसे इस परियोजना को अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ। इन संशोधनों के आधार पर परियोजना को अतिरिक्त एफएआर एवं अन्य लाभ दिए गए ताकि आईटी एवं आईटीईएस गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके। अब उपलब्ध लेआउट प्लान एवं वास्तविक स्थिति का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि जिन भवनों को आईटी/आईटीईएस उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था, उनमें अनेक ऐसे संस्थान संचालित हैं जिनका मुख्य व्यवसाय आईटी अथवा आईटीईएस नहीं है। उदाहरणस्वरूप, भवन 7A/7B में स्थित कुछ कंपनियों के सार्वजनिक कॉर्पोरेट अभिलेख दर्शाते हैं कि उनका प्रमुख व्यवसाय खनन, व्यापार, खाद्य उत्पाद, मसाले एवं अन्य गैर-आईटी गतिविधियों से संबंधित है।
पीड़ितों का कहना है कि यदि वास्तव में आईटी/आईटीईएस पार्क के लिए प्राप्त अतिरिक्त एफएआर एवं अन्य रियायतों का उपयोग गैर-आईटी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, तो यह विषय विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच का पात्र है। यदि छोटे स्तर पर होने वाले उल्लंघनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है, तो बड़े डेवलपर्स द्वारा किए गए संभावित उल्लंघनों की भी उसी निष्पक्षता और कठोरता से जांच एवं कार्रवाई होनी चाहिए। प्रभावित निवासियों ने आग्रह किया कि डीएलएफ साइबर सिटी के सभी भवनों का स्वतंत्र निरीक्षण कर यह जांच की जाए कि क्या वास्तविक उपयोग स्वीकृत लाइसेंस एवं आईटी/आईटीईएस पार्क की शर्तों के अनुरूप है। यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध कानून के अनुसार समान रूप से कार्रवाई की जाए।
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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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