Gurugram News: अगले छह माह में टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर का 100 प्रतिशत उपयोग करने का टारगेट
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने गुरुग्राम में टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर के उपयोग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी छह माह के भीतर शोधित जल के 100 प्रतिशत पुनः उपयोग का लक्ष्य प्राप्त किया जाए।
गुरुग्राम: गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने गुरुग्राम में टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर के उपयोग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी छह माह के भीतर शोधित जल के 100 प्रतिशत पुनः उपयोग का लक्ष्य प्राप्त किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रेन नंबर-8 (नजफगढ़ ड्रेन) में टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर की एक भी बूंद का निर्वहन नहीं होना चाहिए।
टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर के प्रमुख उपभोक्ताओं, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, गैर-सरकारी संगठनों तथा जीएमडीए अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीईओ ने सिंचाई, औद्योगिक उपयोग, भूजल पुनर्भरण, ग्रीन बेल्ट, पार्कों तथा अन्य गैर-पेयजल उद्देश्यों के लिए शोधित जल के अधिकतम उपयोग पर बल दिया।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि धनवापुर एसटीपी से प्राप्त 143 एमएलडी टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर का वर्तमान में सिंचाई कार्यों में उपयोग किया जा रहा है, जिससे एसटीपी चैनल के आसपास स्थित गांवों को लाभ मिल रहा है। बहरामपुर एसटीपी से प्राप्त लगभग 70 एमएलडी शोधित जल का उपयोग उद्योगों, भूजल पुनर्भरण, ग्रीन बेल्ट, पार्कों एवं जलाशयों के रखरखाव में किया जा रहा है। टेक्सटाइल उद्योग के प्रतिनिधियों ने बताया कि बहरामपुर एसटीपी से प्राप्त लगभग 10 एमएलडी शोधित जल का उपयोग उद्योगों द्वारा अपनी पाइपलाइन एवं पंपिंग अवसंरचना के माध्यम से किया जा रहा है। जीएमडीए को औद्योगिक उपभोक्ताओं को शोधित जल की आपूर्ति से प्रतिमाह लगभग 30 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है।

तालाबों के माध्यम से भूजल स्तर बढ़ाने की पहल: जीएमडीए द्वारा सकतपुर, टिकली एवं शिलोखरा स्थित तालाबों में शोधित जल का उपयोग कर भूजल पुनर्भरण भी किया जा रहा है। बैठक के दौरान गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में अतिरिक्त जलाशयों के निर्माण का सुझाव दिया, ताकि शोधित जल का भंडारण एवं उपयोग किया जा सके। इस पर सीईओ ने अधिकारियों को ऐसे प्रस्तावों की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के निर्देश दिए।
अगस्त 2027 तक 165 एमएलडी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी; बैठक में बताया गया कि 90 एमएलडी एवं 75 एमएलडी क्षमता की दो एसटीपी उन्नयन परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है, जिन्हें अगस्त 2027 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर 165 एमएलडी अतिरिक्त टर्शियरी ट्रीटेड वॉटर पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध होगा।
अग्निशमन कार्यों में भी होगा शोधित जल का उपयोग: बैठक में फायर स्टेशनों को आग बुझाने संबंधी कार्यों के लिए शोधित जल उपलब्ध कराने की संभावनाओं का भी परीक्षण करने का निर्णय लिया गया, जिससे गैर-पेयजल उपयोगों में ताजे पानी पर निर्भरता कम की जा सके।

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