Gurugram News: जलभराव पर रहेगी पैनी नजर : आईआईटी गांधीनगर की तकनीक से होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

कर्मचारियों को दिया फ्लड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम का प्रशिक्षण

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नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) ने मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने तथा तकनीक आधारित शहरी प्रबंधन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

गुरुग्राम: नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) ने मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने तथा तकनीक आधारित शहरी प्रबंधन को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एमसीजी ने आईआईटी गांधीनगर एवं एआईआरइएसक्यू के सहयोग से विकसित फ्लड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) की विस्तृत समीक्षा की तथा इसके प्रभावी संचालन के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया।IMG-20260628-WA0012
 
अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में नगर निगम की जीआईएस टीम तथा मानसून मॉनिटरिंग सेल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को डीएसएस के व्यावहारिक उपयोग की गहन जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बताया गया कि किस प्रकार सिस्टम के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में संभावित जलभराव की स्थिति का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है, प्रस्तावित मानसून संबंधी कार्यों का डिजिटल परीक्षण किया जा सकता है तथा नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पहले उनके संभावित प्रभावों का आकलन किया जा सकता है।
 
विशेषज्ञों ने अधिकारियों को सिस्टम से प्राप्त रिपोर्टों का विश्लेषण करने, फील्ड टीमों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा रियल टाइम डेटा को लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया का भी प्रशिक्षण दिया। इससे मानसून के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक एवं प्रभावी होगी।IMG-20260628-WA0013
 
सेंसर बताएंगे जलभराव की स्थिति 
इस अवसर पर आईआईटी गांधीनगर की विशेषज्ञ टीम, जिसका नेतृत्व प्रो. उदित भाटिया तथा पद्मश्री प्रो. अशोक झुनझुनवाला ने किया, ने शहर में स्थापित विभिन्न सेंसरों का फील्ड निरीक्षण भी किया। ये सेंसर वर्षा, जलस्तर एवं अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ों का रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराएंगे, जिसे फ्लड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम से जोड़कर संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की निगरानी तथा समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
 
समस्या से निपटने में मिलेगी मदद 
अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका ने बताया कि यह प्रणाली न केवल मानसून के दौरान त्वरित निर्णय लेने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में जल निकासी संबंधी परियोजनाओं की वैज्ञानिक योजना बनाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा नागरिकों को अधिक सुरक्षित एवं बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
 
 
मानसून प्रबंधन को मिलेगी मजबूती 
निगमायुक्त प्रदीप दहिया के अनुसार यह पहल उद्योग–शासन–शैक्षणिक संस्थानों के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नगर निगम गुरुग्राम का उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक विश्लेषण और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली के माध्यम से शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं नागरिक-केंद्रित बनाना है। इससे मानसून प्रबंधन को नई मजबूती मिलेगी और गुरुग्राम को एक स्मार्ट, सुरक्षित एवं भविष्य के लिए तैयार शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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