Nuh mewat news: हरियाणा सरकार के 12 वर्षों में पशुधन संरक्षण को मिली नई दिशा : उपायुक्त नूंह
वर्तमान चरण के दौरान नूंह जिले में अब तक लगभग 1.30 लाख पशुओं का उनके घर-द्वार पर टीकाकरण किया जा चुका है
हरियाणा सरकार द्वारा पिछले 12 वर्षों में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। पशुधन को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाया जा रहा मुंहखुर (बांग) एवं गलघोंटू उन्मूलन हेतु संयुक्त टीकाकरण अभियान सफलता की ओर अग्रसर है।
नूंह; हरियाणा सरकार द्वारा पिछले 12 वर्षों में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए किए गए प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। पशुधन को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा चलाया जा रहा मुंहखुर (बांग) एवं गलघोंटू उन्मूलन हेतु संयुक्त टीकाकरण अभियान सफलता की ओर अग्रसर है। यह बात उपायुक्त अखिल पिलानी ने जिला में चल रहे अभियान की समीक्षा के दौरान कही।
उपायुक्त ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पशुओं को रोगमुक्त बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि हरियाणा देश का ऐसा अग्रणी राज्य बना है, जहां मुंहखुर (बांग) एवं गलघोंटू जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए संयुक्त वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है। इससे पशुओं को अलग-अलग टीके लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा टीकाकरण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बन गई है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपनिदेशक डॉ. वीरेंद्र सहरावत ने बताया कि मुंहखुर (बांग) एवं गलघोंटू पशुओं में फैलने वाली अत्यंत गंभीर और संक्रामक बीमारियां हैं, जिनसे पशुधन और दुग्ध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा उपयोग की जा रही संयुक्त वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित एवं प्रभावी है तथा पशुओं को दोनों बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है।
डॉ. सहरावत ने बताया कि 11 मई से प्रारंभ हुआ यह अभियान संयुक्त टीकाकरण कार्यक्रम का ग्यारहवां चरण है। इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2019-20 में की गई थी और तब से लगातार राज्यभर में सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। वर्तमान चरण के दौरान नूंह जिले में अब तक लगभग 1.30 लाख पशुओं का उनके घर-द्वार पर टीकाकरण किया जा चुका है, जबकि 18 जून तक लगभग 1.79 लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उपायुक्त अखिल पिलानी ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उसकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। सरकार के पिछले 12 वर्षों के दौरान पशुपालन क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने, टीकाकरण कार्यक्रमों के विस्तार तथा पशुपालकों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू की गई हैं।
उन्होंने बताया कि लक्ष्य की समयबद्ध पूर्ति के लिए विभागीय टीमें गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं का टीकाकरण कर रही हैं ताकि कोई भी पात्र पशु इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे। उपायुक्त ने जिले के सभी पशुपालकों से अभियान में सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि टीकाकरण के दौरान उनके मोबाइल नंबर पर प्राप्त होने वाले ओटीपी को केवल पशुपालन विभाग के अधिकृत कर्मचारी या टीम के साथ ही साझा करें। यह ओटीपी ऑनलाइन सत्यापन एवं पंजीकरण रिकॉर्ड की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पशुधन सुरक्षा और पशुपालकों की समृद्धि के लिए सरकार की प्रतिबद्धता लगातार जारी रहेगी तथा ऐसे अभियान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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