डीएलएसए के माध्यम से गरीबों को मिलती है नि:शुल्क कानूनी सहायता - सेशन जज डॉ. सुशील कुमार गर्ग
लोक अदालत के जरिए मामलों का त्वरित समाधान संभव, लोगों से जागरूक होने की अपील
जिला एवं सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के चेयरमैन डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नूंह द्वारा आमजन को नि:शुल्क कानूनी सहायता, लोक अदालत तथा सामाजिक जागरूकता अभियानों के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है।
नूंह: जिला एवं सत्र न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के चेयरमैन डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नूंह द्वारा आमजन को नि:शुल्क कानूनी सहायता, लोक अदालत तथा सामाजिक जागरूकता अभियानों के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गरीब, जरूरतमंद एवं अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित लोगों को डीएलएसए के माध्यम से पूरी तरह नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाती है, जिसके लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।

उन्होंने कहा कि यह सुविधा केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्ध है। जरूरत इस बात की है कि लोगों में जागरूकता बढ़े और उन्हें यह जानकारी हो कि आर्थिक रूप से कमजोर होने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें कानूनी सहायता नहीं मिलेगी। डीएलएसए के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को फ्री ऑफ कॉस्ट कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। आमजन हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर भी नि:शुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
लोक अदालत से समय और धन दोनों की बचत
डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि लोक अदालत आमजन को सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों का समाधान आपसी समझौते के आधार पर उसी दिन किया जा सकता है। लोक अदालत में समझौता होने पर उसी दिन अवार्ड एवं डिक्री पारित कर दी जाती है, जिससे लोगों को लंबे समय तक अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में ट्रैफिक चालान, मोटर दुर्घटना दावा मामले तथा आईपीसी की धारा 323 और 325 जैसे छोटे अपराधों से जुड़े मामलों का भी निपटारा किया जा सकता है। इससे न्याय प्रक्रिया सरल, सस्ती और त्वरित बनती है।
सामाजिक जागरुकता अभियान से जोड़ने की पहल
उन्होंने बताया कि मुस्लिम समाज में मदरसा, मौलवी, हाजी एवं मुफ्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा समाज पर उनका सकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव डीएलएसए नेहा गुप्ता द्वारा यह पहल की गई है कि जागरूकता अभियानों में समाज के प्रभावशाली वर्गों को भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि इन लोगों के माध्यम से साइबर अपराध, दहेज प्रथा और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ प्रभावी संदेश समाज तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही बच्चों, विशेषकर लड़कियों को अधिक से अधिक स्कूल भेजने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी समाज को प्रेरित किया जाता है।

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