Panchkula News: जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुआ अत्याचार लोकतंत्र पर सीधा हमला, युवाओं की आवाज़ को दमन से नहीं दबाया जा सकता : सुधा भारद्वाज
शिक्षा, रोजगार और न्याय की मांग करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज अस्वीकार्य; सरकार संवाद के बजाय दमन की राजनीति कर रही है
हरियाणा महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री सुधा भारद्वाज ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ हुई मारपीट और दमनात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला बताया है।
पंचकूला: हरियाणा महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री सुधा भारद्वाज ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ हुई मारपीट और दमनात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की मूल भावना पर हमला बताया है।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि देश का युवा अपने भविष्य, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, रोजगार और न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहा था, लेकिन सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन पर बल प्रयोग का रास्ता चुना। यह किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि लाठी और गिरफ्तारी से छात्रों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। सरकार को युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि उन्हें डराने और चुप कराने का प्रयास करना चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि देश का युवा लगातार पेपर लीक, भर्ती में अनियमितताओं, बढ़ती बेरोज़गारी और शिक्षा व्यवस्था की खामियों से परेशान है। ऐसे समय में सरकार का दायित्व युवाओं के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन भाजपा सरकार संवेदनशीलता दिखाने के बजाय दमनकारी रवैया अपना रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों के न्यायपूर्ण संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ी है और शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े हर मुद्दे पर युवाओं की आवाज़ को बुलंद करती रहेगी। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर की घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो तथा छात्रों पर की गई दमनात्मक कार्रवाई के लिए सरकार देश के युवाओं से माफी मांगे।
सुधा भारद्वाज ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उनकी आवाज़ को दबाने की नहीं, सुनने और सम्मान देने की आवश्यकता है। लोकतंत्र संवाद से चलता है, दमन से नहीं।

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