Faridabad News : संस्कारयुक्त परिवार ही राष्ट्र की उन्नति का आधार: आचार्य पुनीत शास्त्री
आर्य केन्द्रीय सभा (नगर निगम क्षेत्र) फरीदाबाद के तत्वावधान में श्रावणी पर्व के पावन उपलक्ष्य में आयोजित आठ दिवसीय वेद प्रचार कार्यक्रम का समापन हुआ। इस श्रृंखला के अंतर्गत, बीस महत्वपूर्ण पुस्तकों के रचयिता, प्रख्यात शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय विश्वामित्र सत्यार्थी की पुण्यतिथि के अवसर पर 3सी ब्लॉक में 'भावांजलि समर्पण दिवस' के रूप में एक विशेष पारिवारिक सत्संग का सफल आयोजन किया गया।
आर्य केन्द्रीय सभा (नगर निगम क्षेत्र) फरीदाबाद के तत्वावधान में श्रावणी पर्व के पावन उपलक्ष्य में आयोजित आठ दिवसीय वेद प्रचार कार्यक्रम का समापन हुआ। इस श्रृंखला के अंतर्गत, बीस महत्वपूर्ण पुस्तकों के रचयिता, प्रख्यात शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय विश्वामित्र सत्यार्थी की पुण्यतिथि के अवसर पर 3सी ब्लॉक में 'भावांजलि समर्पण दिवस' के रूप में एक विशेष पारिवारिक सत्संग का सफल आयोजन किया गया। 
इस गरिमामयी अवसर पर मुख्य वक्ता, सुविख्यात वैदिक विद्वान आचार्य डॉक्टर पुनीत शास्त्री ने स्व. विश्वामित्र सत्यार्थी तथा स्व. स्वदेश सत्यार्थी के सामाजिक, धार्मिक व पारिवारिक योगदान एवं उनकी महान उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दोनों पुण्यात्माओं को समाज का सच्चा प्रेरणास्रोत बताते हुए एक सुसंस्कृत सुदृढ़ परिवार के निर्माण के महत्व को गहराई से रेखांकित किया। अपने व्याख्यान में आचार्य ने महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को रेखांकित करते हुए कहा कि वेदों के आधार पर माता-पिता ही बालक के प्रथम गुरु और प्रत्यक्ष देवता हैं। अंधविश्वासों और पाषाण पूजा के स्थान पर जीवित माता-पिता की सेवा ही सच्ची 'देवपूजा' है। माता-पिता के असीम उपकारों के प्रति कृतज्ञता जताते हुए उन्होंने कहा कि तन, मन और धन से उनकी सेवा करके ही मनुष्य 'पितृ ऋण' से मुक्त हो सकता है। माता-पिता का उपकार कभी चुकाया नहीं जा सकता। वे अपनी संतान को प्रगति पथ पर देखकर सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं। हमें सदैव माता-पिता का आदर-सत्कार कर उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को उन्नत बनाना चाहिए। अंत में उन्होंने भावुक संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता का उपकार कभी चुकाया नहीं जा सकता। वे अपनी संतान को आगे बढ़ते देख सर्वाधिक प्रसन्न होते हैं। हमें सदैव उनका आदर-सत्कार करना चाहिए और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहिए। व्याख्यान के दौरान आचार्य ने जीवन की नश्वरता और परलोक गमन की तैयारी पर गंभीर चर्चा की। उन्होंने महात्मा बुद्ध और गौतमी के प्रसंग का स्मरण कराते हुए कहा कि इस नश्वर संसार से हर किसी को एक न एक दिन जाना ही है। विडंबना यह है कि लोग यहाँ स्थायी रूप से रहने की योजना बनाते हैं। आज मनुष्य को दुनिया की सब बातें याद रहती हैं, लेकिन वह ईश्वर को भूल जाता है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि मृत्यु अटल है और इससे कोई बच नहीं सकता। अंत समय में हमारा कमाया धन यहीं धरा रह जाता है
कार्यक्रम के संयोजक वसु मित्र सत्यार्थी ने कार्यक्रम में पधारे सभी आमंत्रित विद्वानों, अतिथियों और श्रद्धालु जनों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए अंत में सभी का हृदय से धन्यवाद व आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुकुल इंद्रप्रस्थ के प्राचार्य आचार्य ऋषि पाल ने की। योगेंद्र फोर ने सत्यार्थी दंपत्ति के शिक्षा व आर्य समाज में दिए गए अतुलनीय योगदान की जमकर सराहना की और उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक यज्ञ के साथ हुआ, जिसे पुरोहित कर्मचारी द्वारा कराया गया। यज्ञ में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने आहुति डालकर विश्व कल्याण की कामना की। इसके बाद जितेंद्र सरल ने कुशल मंच संचालन किया और अपने मधुर भजनों की प्रस्तुति से पूरे वातावरण को भक्तिमय और आनंदमय बना दिया। अंत में प्रधान देशबंधु आर्य ने वेद प्रचार कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी के सहयोग की सराहना की और सभी का आभार प्रकट किया। इस गरिमामयी अवसर पर फरीदाबाद की विभिन्न आर्य समाजों, धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

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