हरियाणा वक्फ बोर्ड गठन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, अवमानना मामले में नोटिस जारी, अगली सुनवाई 14 जुलाई तय
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा वक्फ बोर्ड के गठन में लगातार हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
मेवात/चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा वक्फ बोर्ड के गठन में लगातार हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अवमानना याचिका COCP-2110-2026 (डॉ. मोहम्मद अरशद बनाम सुधीर राजपाल, आईएएस) में नोटिस ऑफ मोशन जारी करते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। वही अदालत ने राज्य सरकार की मांग को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 तय कर दी है। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि जवाब समय पर दाखिल किया जाए।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेशों के बावजूद वक्फ बोर्ड का गठन न होना चिंताजनक है। हरियाणा सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता नवीन सिंह पंवार पेश हुए और नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
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इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा दायर रिव्यू याचिका पर भी अदालत ने सुनवाई निर्धारित कर दी है। न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि हरियाणा सरकार 15 मई 2026 तक एक विस्तृत हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे, जिसमें वक्फ बोर्ड के गठन की प्रगति की पूरी जानकारी दी जाए।
गौरतलब है कि अदालत ने अपने 12 नवंबर 2025 के आदेश में स्पष्ट रूप से हरियाणा वक्फ बोर्ड का गठन निर्धारित समय-सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए थे। उस समय राज्य सरकार ने भी यह आश्वासन दिया था कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन माह के भीतर गठन प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है। अदालत ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अंतरिम व्यवस्थाओं को जारी रखना न्यायालय के आदेश की मंशा के विपरीत प्रतीत होता है।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने 12 नवंबर 2025 के आदेश में संशोधन या स्पष्टीकरण के लिए आवेदन दायर करते हुए “प्रोस्पेक्टिव एप्लीकेशन” का तर्क दिया है, जो भ्रामक और कानून के विपरीत है। इसे आदेश के अनुपालन से बचने की कोशिश बताया गया है।
यह मामला Waqf Act, 1995 और Waqf (Amendment) Act, 2025 के प्रावधानों से भी जुड़ा हुआ है, जिनके तहत वक्फ बोर्ड का गठन समयबद्ध तरीके से किया जाना आवश्यक है।
फिलहाल अदालत के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है।




